नदी के बीच मची इस चीख-पुकार और दहशत के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
पंखे में कपड़ा फंसा और खत्म हुआ डीजल
प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के अनुसार, स्टीमर सुबह अपने पहले फेरे पर निकला था। बीच नदी में पहुंचते ही अचानक स्टीमर के प्रोपेलर (पंखे) में एक बड़ा कपड़ा फंस गया। उसी समय स्टीमर का डीजल भी पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे इंजन ने काम करना बंद कर दिया। सावन के महीने में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने की वजह से स्टीमर पूरी तरह ओवरलोड था।
प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के अनुसार, स्टीमर सुबह अपने पहले फेरे पर निकला था। बीच नदी में पहुंचते ही अचानक स्टीमर के प्रोपेलर (पंखे) में एक बड़ा कपड़ा फंस गया। उसी समय स्टीमर का डीजल भी पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे इंजन ने काम करना बंद कर दिया। सावन के महीने में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने की वजह से स्टीमर पूरी तरह ओवरलोड था।
5 किलोमीटर तक बहाव में बहती रही जिंदगी
उफनती चंबल नदी के तेज करंट के कारण स्टीमर चालक का नियंत्रण पूरी तरह खो गया। स्टीमर में सवार स्टाफ ने लंबी बल्लियों और लाठियों के सहारे इसे रोकने की काफी कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि जहाज मुरैना से बहते हुए 5 किलोमीटर दूर भिंड जिले के अटेर क्षेत्र की सीमा में पहुंच गया।
उफनती चंबल नदी के तेज करंट के कारण स्टीमर चालक का नियंत्रण पूरी तरह खो गया। स्टीमर में सवार स्टाफ ने लंबी बल्लियों और लाठियों के सहारे इसे रोकने की काफी कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि जहाज मुरैना से बहते हुए 5 किलोमीटर दूर भिंड जिले के अटेर क्षेत्र की सीमा में पहुंच गया।
सुरक्षा उपकरणों की भारी लापरवाही
मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने मीडिया को बताया कि यह स्टीमर उत्तर प्रदेश के आगरा (लोक निर्माण विभाग) द्वारा संचालित किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतने बड़े स्टीमर पर एक भी लाइफ जैकेट या लाइफ ट्यूब उपलब्ध नहीं थी। प्रशासन ने तुरंत उत्तर प्रदेश के आगरा प्रशासन से संपर्क कर इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताई है।
मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने मीडिया को बताया कि यह स्टीमर उत्तर प्रदेश के आगरा (लोक निर्माण विभाग) द्वारा संचालित किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इतने बड़े स्टीमर पर एक भी लाइफ जैकेट या लाइफ ट्यूब उपलब्ध नहीं थी। प्रशासन ने तुरंत उत्तर प्रदेश के आगरा प्रशासन से संपर्क कर इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताई है।
2 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित रेस्क्यू
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय नाविकों और आपातकालीन टीम की मदद से बीच नदी में फंसे स्टीमर तक डीजल पहुंचाया गया। करीब 2 घंटे की बेहद खतरनाक और कड़ी मशक्कत के बाद स्टीमर को भिंड जिले के कच्छपुरा घाट पर सुरक्षित किनारे लगाया गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्रशासन द्वारा उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गई। घाट पर कदम रखते ही यात्रियों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और राहत की सांस ली।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय नाविकों और आपातकालीन टीम की मदद से बीच नदी में फंसे स्टीमर तक डीजल पहुंचाया गया। करीब 2 घंटे की बेहद खतरनाक और कड़ी मशक्कत के बाद स्टीमर को भिंड जिले के कच्छपुरा घाट पर सुरक्षित किनारे लगाया गया। सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्रशासन द्वारा उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गई। घाट पर कदम रखते ही यात्रियों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और राहत की सांस ली।
बेहद गंभीर और डराने वाली घटना
यह एक बेहद गंभीर और डराने वाली घटना है, लेकिन राहत की बात यह है कि सभी यात्री सुरक्षित घाट पर पहुंच गए। चंबल नदी के तेज बहाव के बीच 100 से अधिक यात्रियों और 50 बाइकों से भरे स्टीमर में खराबी आना एक बड़ा हादसा बन सकता था। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद प्रशासन या नाविकों द्वारा इसे सुरक्षित किनारे लगाना बड़ी कामयाबी रही।
इस घटना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- घटना: पहले फेरे के दौरान स्टीमर में अचानक तकनीकी खराबी आ गई।
- प्रभाव: तेज बहाव के कारण स्टीमर बहकर मुरैना से भिंड जिले की सीमा तक पहुंच गया।
- यात्री: स्टीमर पर 100 से अधिक लोग और 50 मोटरसाइकिलें सवार थीं।
- मार्ग: यह स्टीमर सहसपुर घाट से बटेश्वर महादेव मंदिर की ओर जा रहा था।
- बचाव: करीब 2 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद स्टीमर को सुरक्षित घाट पर लगाया गया।
















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