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#mamakadhamakanews: पिछोर में महुअर नदी का रौद्र रूप: 1985 के बाद आया ऐसा उफान, खेत बने तालाब, पूरी तरह तबाह हुईं फसलें, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अलर्ट मोड़ पर टीम के साथ हालात पर पाया काबू

रविवार, 9 अगस्त 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। पिछोर तहसील में रात भर हुई मूसलाधार बारिश ने कोहराम मचा डाला। खेत तालाब बन गए, सड़कों पर पानी बह निकला, गांव में स्कूल और घरों को पानी ने चारों तरफ से घेर लिया। ये बारिश शुक्रवार की देर रात हुई और शनिवार की सुबह हर तरफ पानी ही पानी था। महुअर नदी का पानी गांवों में घुस गया। गुरुकुदवाया, शाजापुर और उमरीकला में बाढ़ जैसे हालात बने। स्थानीय बुजुर्गों और ग्रामीणों के अनुसार, नदी में साल 1985 के बाद यानी करीब 41 वर्षों में ऐसा भयानक और रौद्र रूप पहली बार देखा गया है।
खोड़-पिछोर मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद, सड़कों पर बहा 3 फीट तक पानी, आवागमन ठप
आलम ये हुआ कि बारिश के चलते खोड़-पिछोर मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद था। सड़कों पर 3 फीट तक पानी नजर आया जिससे आवागमन ठप हो गया। नदी का यह तेज बहाव पिछोर से आगे बढ़ते हुए करैरा तक पहुंच गया, जहां करैरा पुल पर भी नदी इस सीजन में पहली बार अपने पूरे वेग के साथ बहती दिखाई दी।
टापू बने गांव, घरों और स्कूलों में घुसा पानी
नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि ग्राम पंचायत गुरुकुदवाया, बूढ़ोन शाजापुर, उमरीकला और पायगा समेत कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से प्रवेश कर गया. गुरुकुदवाया गांव का प्राथमिक व माध्यमिक सरकारी स्कूल चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गया. निचले रिहायशी इलाकों के घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को अपने परिवार और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों व ऊंचाई वाले क्षेत्रों की ओर भागना पड़ा. शाजापुर गांव से आई तस्वीरों में बिजली के खंभे पानी में डूबे नजर आए और कई लोगों ने मुश्किल से अपने घरों की छतों पर रात काटी। 
खेत बने तालाब, फसलें पूरी तरह चौपट
इस आपदा का सबसे बड़ा नुकसान अन्नदाताओं को उठाना पड़ा है। सैकड़ों बीघा कृषि भूमि इस समय तालाब का रूप ले चुकी है। खेतों में खड़ी सोयाबीन, उड़द और अन्य खरीफ की फसलें पूरी तरह से जलमग्न होकर नष्ट हो गई हैं। किसानों का कहना है कि बाढ़ अपने साथ खेतों की खड़ी फसलें बहाकर ले गई है, जिससे उनके सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा के साथ प्रशासनिक अमला और राहत कार्य चौकस
हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा के साथ स्थानीय प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया। कलेक्टर ने कहा कि पहले बाढ़ के हालात से निपटना आवश्यक है उसके बाद हम खराब फसलों का तत्काल सर्वे कराएंगे। इधर उनकी टीम के द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही थी और सुरक्षा के लिहाज से एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मौके पर तैनात कर दिया गया। राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है और नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन गांवों में जमा पानी और कीचड़ की वजह से लोगों की मुश्किलें लगातार बरकरार है।

















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