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#mamakadhamakanews: शिवपुरी के 60 प्रतिभागी "आनंदम" सहयोगी कार्यशाला का बने हिस्सा, खुद से मिलने की यात्रा का किया अनुभव

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

/ by Vipin Shukla Mama
* भोपाल में तीन दिवसीय कार्यशाला में जाना आनंद बाहर खोजने की चीज नहीं खुद को पहचानने की अनुभूति है
शिवपुरी। हर व्यक्ति का जीवन भागदौड़ में बीत रहा है और परिस्थितियों से जूझने में वह इतना व्यस्त हो गया है कि स्वयं को जानना, सुनना और समझना ही भूल गया है। इसी भागदौड़ के बीच स्वयं के लिए ठहराव लेने, अपने भीतर झांकने व जीवन के आनंद को पहनानने के उद्देश्य से राज्य आनंद संस्थान मध्यप्रदेश द्वारा जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, पशु चिकित्सा, पुलिस विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों व नागरिकों के 60 सदस्यीय दल के लिए विशेष तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी कार्यशाला आयोजित की। 11 अगस्त से 13 अगस्त शाम तक भोपाल में विभिन्न सत्रों में आयोजित इस कार्यशाला का प्रथम दिन संस्थान के निदेशक सत्यप्रकाश आर्य ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। पहला सत्र आनंद की ओर विषयवस्तु  पर केन्द्रित रहा जिसमें प्रतिभागियों ने जीवन में मौजूद आनंद के अनुभवों को देखने और खुद के भीतर झांककर यह पहचानने का प्रयास किया कि वास्तविक आनंद का स्त्रोत आखिर कहां है। कार्यशाला के अंतिम दिन गुरूवार की शाम संस्थान के निदेशक प्रवीण गंगराणे ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर शिवपुरी से पहुंचे मास्टर ट्रेनर साकेत पुरोहित ने कार्यशाला का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला में अन्य मास्टर ट्रेनर के रूप में डॉ. वीणा सिंह, पुष्पेन्द्र सिसोदिया, विनीत अग्रवाल, चंद्रकांत बोहरे, मौजूद रहे जबकि कार्यक्रम का समन्वय राजेश पटेल द्वारा किया गया। शिवपुरी से पहुंचे 60 प्रतिभागियों में से विशेष रूप से राजेन्द्र पिपलौदा, स्नेह सिंह रघुवंशी, नीरज सरैया, अतुल गौड, बृजेन्द्र भार्गव, अनिल पाराशर, संजय श्रीवास्तव, रंजना शर्मा, सलमा खान, वीरेन्द्र शिवहरे, मनोज खत्री, बालूराम रावत, हेमंत खटीक, निर्मित मिश्रा, रेखा रघुवंशी, पारवती रघुवंशी, बलराम त्रिपाठी, धर्मेन्द्र साहू, रश्मि भट्ट, भूपेन्द्र चंदेल, सुनील उपाध्याय, प्रीति सूर्यन, महेन्द्र करारे, महेश भार्गव, राजू पुरोहित, मनुराजा चौहान, सुरेन्द्र तिवारी आदि मौजूद थे। 
जीवन की बैलेंस सीट, नदी व मौन से जाना खुद को...
विभिन्न सत्रों पर आधारित इस कार्यशाला में तीन दिन के दौरान मास्टर ट्रेनर से प्रतिभागियों की खुद से पहचान कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित कीं जिनमें जीवन की बैलेंस सीट के माध्यम से यह सूचीबद्ध किया गया कि किसने हमारे साथ अच्छा किया और हमने किस-किस के साथ अच्छा किया। इससे यह जाना जा सके कि नि:स्वार्थ भाव से मदद करने में अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। इसी तरह जीवन की नदी के माध्यम से यह जाना कि विभिन्न अवरोधों के बावजूद जीवन की धारा निरंतर चलती रहती है और खुद को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए आत्ममंथन किया। इसी तरह प्रकृति के साथ आत्मपोषण की गतिविधि की गई। वहीं स्वयं से जुडऩे के लिए कनेक्शन, करेक्शन और डायरेक्शन के माध्यम से जीवन को सही दिशा देने की प्रक्रिया को समझाया गया। इसके अलावा स्वयं को पत्र लिखने एवं ढाई घंटे के मौन के माध्यम से स्वयं के साथ गहरा संवाद किया गया।
















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