शिवपुरी। जिले की तहसील खनियाधाना से आज एक शोक भरी खबर सामने आई "महाराज खनियाधाना नहीं रहे", इस घड़ी में मामा का धमाका डॉट कॉम परिवार गहन शोक व्यक्त करता है, साथ ही प्रदेश सरकार के दिव्यांजन आयुक्त डॉ अजय खेमरिया की त्वरित श्रद्धांजलि हम उन्हीं की कलम से आपके लिए प्रकाशित कर रहे हैं....
#महाराज खनियाधाना नहीं रहे हैं
#एक स्वतंत्र स्टेट थी खनियाधाना जिसके प्रतापी राजा हुए हैं महाराज खलक सिंह जूदेव।
शिवपुरी जिले की यह रियासत अपने राजसी प्रभुत्व से ज्यादा राष्ट्रीयता के लिए जानी जाती है।
#यह संयोग ही है कि हर साल 15 अगस्त को किसी न किसी अखबार में खनियाधाना की चर्चा होती ही रही है कारण महाराजा खलक सिंह और महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जुगलबंदी के साथ।
#महाराज खनियाधाना भानू प्रताप सिंह आज नही रहे है वे खलक सिंह जी के वारिस थे और पिछोर से विधायक भी रह चुके थे।
#जीवन के अंतिम समय तक वे अपनी रियासत और बसई कोठी में ही रहे।
#वाकया यूं है कि महाराज खलक सिंह झांसी से अपनी विदेशी कार में सवार होकर वापिस खनियाधाना आ रहे थे, रास्ते में उनकी गाड़ी में कुछ गड़बड़ हुई। वे सड़क किनारे खड़े हो गए तभी अचानक से एक तेज आवाज उनके पीछे हुई वे पलटकर देख भौचक रहे गए कारतूस उनके पीछे पड़ा थी और साथ में एक जहरीला सांप।
अचूक निशानेबाज युवक को देखकर महाराजा समझ गए कि यह कोई असाधारण शख्स है।
उस नवयुवक को महाराज अपने साथ ले आये।
#उस नवयुवक का नाम था: चंद्रशेखर आजाद
कहते हैं महाराज ने ही उन्हें आजाद उपाधि दी थी। वे रियासत के सीतापाठा में कई महीनों तक रहे।
इस बीच महाराजा और क्रांतिकारी बुंदेलखंड में मिलकर क्रांति की मशाल जलाते रहे।
#महाराज भानु प्रताप सिंह भी अंतिम समय तक इसी पारिवारिक राष्ट्रीयता के भाव से सक्रिय रहे।
#आज महाराज अंतिम यात्रा पर निकल चुके हैं। उनकी धर्मपत्नी रानी साहब स्व. पद्मा राजे शिवपुरी में भाजपा की जिलाध्यक्ष रही हैं।
















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