प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाले इस क्लिनिक में क्लब फुट से ग्रसित बच्चों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण एवं उपचार किया जाता है। शिविर में हड्डी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ. पंकज शर्मा ने बच्चों का बारीकी से परीक्षण कर आवश्यक उपचार किया और परिजनों को उपचार के बाद बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी।
शिविर के दौरान चिकित्सकीय जांच के बाद 4 बच्चों के पैरों का प्लास्टर किया गया। वहीं, उपचार के अगले चरण में पहुंच चुके 7 बच्चों को अनुष्का फाउंडेशन की ओर से विशेष प्रकार के जूते मुफ्त उपलब्ध कराए गए। डॉक्टरों के अनुसार, उपचार के बाद पैरों को स्थायी रूप से सही स्थिति में बनाए रखने के लिए इन विशेष जूतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस अवसर पर हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. निशांत वर्मा, डॉ. आयुष, डीईआईसी मैनेजर श्री राजेन्द्र शर्मा, स्टाफ नर्स माधुरी जाट, रामू भदौरिया, दीपक शर्मा तथा अनुष्का फाउंडेशन के प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री दिनेश सोलंकी सहित बच्चों के परिजन उपस्थित रहे। फाउंडेशन के श्री दिनेश सोलंकी ने संस्था के माध्यम से बच्चों को विशेष जूते वितरित किए।
--------------------
विशेष जानकारी: क्या होता है क्लब फुट और कैसे करें इसकी पहचान?
क्या होता है क्लब फुट (Clubfoot)? क्लब फुट (चिकित्सीय भाषा में टैलिस फ्लिपस इक्विनोवेरस) बच्चों में जन्मजात पाई जाने वाली एक शारीरिक विकृति है। इसमें बच्चे का एक या दोनों पैर अंदर और नीचे की तरफ मुड़े हुए होते हैं। सही समय पर इलाज न मिलने से बच्चा सामान्य रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है और विकलांगता का शिकार हो सकता है।
कैसे करें क्लब फुट की पहचान?
• पैर का अंदर की ओर मुड़ना: बच्चे के पैर का पंजा अंदर और नीचे की तरफ घूमा हुआ दिखाई देता है।
• एड़ी का ऊपर खिंचना: पैर की एड़ी सामान्य से छोटी और ऊपर की तरफ खींची हुई महसूस होती है।
• पैर का छोटा दिखना: प्रभावित पैर सामान्य पैर की तुलना में थोड़ा छोटा दिख सकता है।
• चलने में परेशानी: बच्चा जब बड़ा होता है, तो वह पैर के तलवे के बजाय पैर के बाहरी हिस्से (किनारे) के बल चलने की कोशिश करता है।
• दर्द रहित होना: नवजात शिशुओं में इस विकृति के कारण कोई दर्द नहीं होता है, लेकिन समय पर इलाज न होने पर आगे चलकर यह अत्यधिक कष्टदायक हो जाता है।
डॉक्टरों की सलाह: क्लब फुट का इलाज जन्म के तुरंत बाद (पहले या दूसरे हफ्ते से) शुरू कर दिया जाए, तो बिना किसी बड़ी सर्जरी के प्लास्टर (पोंसेटी विधि) और विशेष जूतों की मदद से बच्चे के पैर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।











सच्ची और अच्छी खबरें पढ़ने के लिए लॉग इन कीजिये "मामा का धमाका डॉट कॉम"।
ये है, आपकी अपनी आवाज।
फोन कीजिये। खबर भेजिये वाट्सअप नम्बर 98262 11550 या मेल कीजिये 550vip@gmail.com
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें