शिवपुरी 25 सितंबर 2026। जिले में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार के लिए25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी का अवकाश होने के चलते 26 सितंबर 2026 को विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (ई-PMSMA) का आयोजन किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय ऋषीश्वर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। अभियान के तहत जिला चिकित्सालय, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और समस्त सीएचसी (CHC) एवं पीएचसी (PHC) पर सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान की जाएंगी। महिलाओं के बेहतर इलाज और जांच के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ और चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती की गई है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषीश्वर ने आदेश जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी आवंटित स्वास्थ्य संस्थाओं पर निर्धारित समय सीमा में उपस्थित होकर गर्भवती महिलाओं की जांच एवं उपचार सेवाएं सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही विकासखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सीएचसी के चिकित्सकों को भेजने की व्यवस्था संबंधित बीएमओ (BMO) द्वारा की जाएगी।
* कहां लगी किस चिकित्सक की ड्यूटी
1 जिला चिकित्सालय शिवपुरी डॉ. नीरजा शर्मा, स्त्री रोग, जिला चिकित्सालय
2 सीएचसी पिछोर डॉ. बृजेश शर्मा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
3 सीएचसी खनियाधाना डॉ. रमा टिकरिया, एल.एम.ओ.
4 सीएचसी करैरा डॉ. निशिता शर्मा, एल.एम.ओ.
5 सीएचसी नरवर डॉ. स्नेहा शर्मा, एल.एम.ओ.
6 सीएचसी सतनवाड़ा डॉ. मोनिका मंगल, एल.एम.ओ.
7 सीएचसी पोहरी डॉ. मेघा कोली, एल.एम.ओ.
8 सीएचसी बैराढ़ डॉ. तपेश शर्मा, एल.एम.ओ.
9 सीएचसी बदरवास डॉ. प्रीति मौर्य, एल.एम.ओ.
10 सीएचसी कोलारस डॉ. इंदु जैन, स्त्री रोग विशेषज्ञ
11 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिद्धेश्वर डॉ. अनीता वर्मा, एल.एम.ओ.
12 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कमलागंज डॉ. निवेदिता शर्मा, एल.एम.ओ.
13 पीएचसी खतौरा विकासखण्ड बदरवास डॉ. सुरभि जैन, एल.एम.ओ.
14 पीएचसी रन्नौद विकासखण्ड बदरवास डॉ. हरिशंकर कुशवाह, एम.ओ.
15 पीएचसी चर्च विकासखण्ड पोहरी डॉ. नवल अग्रवाल, एम.ओ.
16 पीएचसी खोड़ विकासखण्ड पिछोर डॉ. छोटू सिंह, एम.ओ.
17 पीएचसी मनपुरा विकासखण्ड पिछोर डॉ. एस.के. साण्डे, एम.ओ.
18 पीएचसी भौंती विकासखण्ड पिछोर डॉ. संकल्प जैन, एम.ओ.
19 पीएचसी मुहारीकलां विकासखण्ड खनियाधाना डॉ. अमोल परिहार, एम.ओ.
20 पीएचसी बामौरकलां विकासखण्ड खनियाधाना डॉ. अनंत गुप्ता, एम.ओ.
21 पीएचसी सिरसौद विकासखण्ड करैरा डॉ. पुष्पेन्द्र तोमर, एम.ओ.
22 पीएचसी दिनारा विकासखण्ड करैरा डॉ. नरेन्द्र मांझी, एम.ओ.
23 पीएचसी अमोलपठा विकासखण्ड करैरा डॉ. सुनील जैन, एम.ओ.
24 पीएचसी खरई विकासखण्ड कोलारस डॉ. दीक्षा खेडकर, एल.एम.ओ.
25 पीएचसी लुकवासा विकासखण्ड कोलारस डॉ. कमल धाकड़, एम.ओ.
26 पीएचसी गढ़ विकासखण्ड कोलारस डॉ. जुगल शर्मा, एम.ओ.
27 पीएचसी सुभाषपुरा विकासखण्ड सतनवाड़ा डॉ. मुस्कान गुप्ता, एल.एम.ओ.
28 पीएचसी मुढ़ेरी विकासखण्ड सतनवाड़ा डॉ. प्रदीप कुमार, एम.ओ.
29 पीएचसी सुरवाया विकासखण्ड सतनवाड़ा डॉ. रलेश महावने, एम.ओ.
30 पीएचसी मगरौनी विकासखण्ड नरवर डॉ. एल.डी. शर्मा, एम.ओ.
31 पीएचसी झिरी विकासखण्ड पोहरी डॉ. देवेश धाकड़, एम.ओ.
32 पीएचसी गाजीगढ विकासखंड पोहरी डॉ. अनिल रावत, एम.ओ.
श्रवण बधिरता सप्ताह अंतर्गत महुकुडिच्छा पिछोर में कार्यक्रम आयोजित
* राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र द्वारा सप्ताह आयोजन के दिए निर्देश
*21-26 सितंबर 2026 तक मनेगा सप्ताह
शिवपुरी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), मध्य प्रदेश के दिशा-निर्देशानुसार जिले भर में 21 से 26 सितंबर 2026 तक श्रवण बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड पिछोर के ग्राम महुकुडिच्छा में आमजन को कान की बीमारियों एवं बहरेपन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संजय ऋषीश्वर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य समुदाय में सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान करना और उनके बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
डॉ. संजय ऋषीश्वर ने बताया कि सप्ताह के दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कानों की जांच के साथ-साथ परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे कान से जुड़ी किसी भी समस्या को अनदेखा न करें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सीय सलाह लें।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा ग्रामीणों व विद्यार्थियों को श्रवण बधिरता (सुनने में परेशानी) के मुख्य कारणों एवं सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया गया:
समय पर जांच: नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में सुनने की समस्या का शुरुआती स्तर पर ही परीक्षण कराना चाहिए ताकि समय रहते इसका उपचार संभव हो सके।
तेज आवाज से बचाव: डीजे, लाउडस्पीकर, हेडफोन या ईयरफोन का तेज आवाज में अत्यधिक इस्तेमाल कानों के पर्दों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कानों की सुरक्षा: कान में किसी भी प्रकार की नुकीली वस्तु (जैसे तीली, पिन आदि), गंदा पानी या तेल डालने से बचें। इससे संक्रमण और बहरेपन का खतरा बढ़ता है।











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