मामला: पीड़ित के बैंक खाते से फर्जी APK फाइल के जरिए 1,16,000 रुपये की ऑनलाइन ठगी।
- कांटेक्ट लिस्ट का इस्तेमाल: जब गिरोह किसी एक व्यक्ति का व्हाट्सएप हैक करता है, तो वे सीधे अनजान नंबर से मैसेज नहीं भेजते। वे पीड़ित के ही व्हाट्सएप अकाउंट से उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और ग्रुप्स में मैलवेयर फाइल फॉरवर्ड करते हैं।
- भरोसे का फायदा: शनिवार और रविवार को आपके किसी परिचित या दोस्त के नंबर से ही एक मैसेज आता है जिसमें लिखा होता है— "यह ऐप डाउनलोड करो, इसमें फ्री रिचार्ज/इनाम/सरकारी योजना का लाभ मिल रहा है।" परिचित का नाम देखकर लोग बिना सोचे-समझे फाइल डाउनलोड कर लेते हैं।
- व्हाट्सएप हैक होने और लगातार फाइलें आगे जाने की वजहयूजर की यह शिकायत बिल्कुल सही है कि यह वायरस लगातार लोगों के व्हाट्सएप से खुद-ब-खुद आगे भेजा जा रहा है। तकनीकी भाषा में इसे 'व्हाट्सएप अकाउंट टेकओवर मैलवेयर' कहा जाता है।
- ऑटो-फॉरवर्डिंग स्क्रिप्ट: जैसे ही कोई पीड़ित उस फर्जी
.apkफाइल (जैसेUpdate.apk,Kyc.apkयाWedding.apk) पर क्लिक करके उसे फोन में इंस्टॉल करता है, वह ऐप बैकग्राउंड में फोन का पूरा कंट्रोल ले लेता है। - मैसेज पढ़ना और भेजना: यह वायरस फोन के एसएमएस (SMS) और व्हाट्सएप मैसेजेस को पढ़ने और खुद से टाइप करने की अनुमति (Permissions) चुरा लेता है। इसके बाद, आपके बिना कुछ किए ही आपके व्हाट्सएप से आपकी पूरी कांटेक्ट लिस्ट को वही वायरस फाइल शनिवार और रविवार को लगातार डिलीवर होने लगती है।
- ओटीपी (OTP) चोरी: इसी दौरान बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने के लिए जो ओटीपी आता है, उसे यह वायरस हैकर्स के सर्वर पर फॉरवर्ड कर देता है और यूजर के फोन से उस डिलीट भी कर देता है, जिससे पैसे कटने का पता देर से चलता है।











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