"तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले..!"
इंदौर में यह दृश्य 18 जून की रात अभय प्रशाल में नजर आया..आयोजन वैसे तो माहेश्वरी समाज, इंदौर का था जिसे 'चका नैन महोत्सव' नाम दिया गया..यहां मुख्य रूप से बतौर श्रोता बनाम दर्शक श्री इंद्रेश महाराज के दर्शन के साथ उनके भजन/प्रवचन सुनने पहुंचे थे..खचाखच भरे अभय प्रशाल की हालत यह थी कि अंदर तो ठीक बाहर भी बड़ी संख्या में खड़े लोग अंदर जाने की जुगाड़ लगा रहे थे..लेकिन बैठने तो क्या खड़े रहने की भी जगह ना होने पर कई लोगों को निराश लौटना पड़ा।
जाहिर है सभी लोग माहेश्वरी समाज से ताल्लुक नहीं रखते थे..क्योंकि महाराज के आग्रह पर सभागार के दरवाजे हर भक्त के लिए आयोजकों ने खोल दिए थे ।
बहरहाल, अंदर हजारों की संख्या में मौजूद लोगों में लगभग 70 प्रतिशत युवा थे..जो भक्ति - आस्था के एक अलग ही आनंद की गंगा में डुबकियां लगा रहे थे..
कुल मिलाकर हजारों लोगों की मौजूदगी के बावजूद यहां किसी प्रकार की अव्यवस्था नजर नहीं आने की वजह आयोजक संस्था द्वारा किये गए समुचित प्रबन्ध थे ।
वैसे भी हजारों की भीड़ बस यहीं गुनगुनाती हुई अंदर प्रवेश कर रही थी..














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