50 लाख की चोरी में पूछताछ के लिए उठाया
करीब 35 दिन पहले हुई 50 लाख रुपये से अधिक की चोरी के मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर मोनू रजक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। शनिवार रात (3 अक्टूबर 2026) को छोड़े जाने के बाद जब उनके शरीर और पैरों पर चोट व सूजन के निशान मिले, तो परिजनों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले सैकड़ों युवाओं में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों युवाओं और रजक समाज के लोगों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है। शिवपुरी में फिजिकल ट्रेनर मोनू रजक मामले में परिजनों के आक्रोश और प्रदर्शन के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस हिरासत से शनिवार रात करीब 9 बजे छोड़े जाने के बाद पीड़ित के परिजनों, रजक समाज के लोगों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सैकड़ों युवाओं ने इस प्रताड़ना के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
हिरासत में लेना: मोनू रजक अपनी पत्नी रजनी रजक और बच्चों के साथ फिजिकल क्षेत्र में किराए के मकान में रहते हैं। उनकी पत्नी के अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को चौहान नाम का एक पुलिसकर्मी मोनू को पूछताछ के बहाने अपने साथ ले गया था।
चोरी का शक: शहर के मातादीन अग्रवाल के घर हुई ₹50 लाख से अधिक की बड़ी चोरी के मामले में पुलिस मोनू पर संदेह कर रही थी। मोनू का आरोप है कि मातादीन अग्रवाल और उनकी पत्नी के कहने पर पुलिस ने उसे निशाना बनाया।
गंभीर मारपीट के आरोप: ट्रेनर मोनू रजक का आरोप है कि फिजिकल और सुभाषपुरा दोनों थानों की पुलिस ने उन पर चोरी का जुर्म कबूल करने का भारी दबाव बनाया। जब उन्होंने इनकार किया, तो उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और मामले को जबरन 'पारदी गैंग' से जोड़ने की कोशिश की गई।
अस्पताल में भर्ती: शनिवार रात करीब 9 बजे पुलिस ने जब मोनू को छोड़ा, तो परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनके हाथ-पैर में गंभीर चोटें और सूजन पाई गई।
पीड़ित की पत्नी (रजनी रजक) का बयान:
मोनू रजक की पत्नी रजनी रजक ने पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई और कहा:
"मेरे पति को 2 अक्टूबर को पुलिस उठाकर ले गई थी। इसके बाद न तो हमें उनसे मिलने दिया गया और न ही उनकी कोई जानकारी दी गई। उन्हें पहले भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था और उन्होंने सहयोग किया था, लेकिन इस बार पुलिस ने उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की है। बिना किसी पुख्ता सबूत के किसी निर्दोष व्यक्ति को इस तरह प्रताड़ित करना पूरी तरह गलत है। हम पुलिस के इस रवैए के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और न्याय के लिए न्यायालय (कोर्ट) की शरण लेंगे।" पीड़ित की पत्नी ने साफ किया है कि यदि पुलिस विभाग के आला अधिकारियों (SP) की तरफ से त्वरित और निष्पक्ष जांच नहीं की जाती है, तो समाज और परिवार मिलकर कोर्ट की शरण (न्यायालय में याचिका) लेंगे।
एसपी (SP) कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन
मोनू रजक की पत्नी रजनी रजक ने सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर एक औपचारिक शिकायत और ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग: ज्ञापन में स्पष्ट रूप से फिजिकल थाने के स्टाफ और पूछताछ में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों (विशेषकर चौहान नामक पुलिसकर्मी) पर बर्बरतापूर्वक मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। मांग की गई है कि थर्ड डिग्री टॉर्चर देने वाले इन कर्मियों को तुरंत सस्पेंड कर जांच शुरू की जाए।
- झूठे मामले में फंसाने की साजिश: आवेदन में कहा गया है कि मोनू को किसी पारदी गैंग या ₹50 लाख की चोरी के इस बड़े मामले से जबरन जोड़ने की साजिश रची जा रही थी। ज्ञापन के जरिए एसपी से सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई गई है।
- मेडिकल रिपोर्ट की मांग: परिजनों ने जिला अस्पताल में कराए गए मोनू के इलाज और मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट को भी इस जांच में शामिल करने को कहा है, जिसमें मोनू के हाथ-पैर में गंभीर चोटें और भारी सूजन साफ देखी जा सकती है।
- सैकड़ों युवाओं की एकजुटता: मोनू से ट्रेनिंग लेने वाले सैकड़ों छात्र और फिजिकल एकेडमी के युवा इस कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। युवाओं का कहना है कि जो ट्रेनर सुबह-शाम बच्चों को देश सेवा और पुलिस भर्ती के लिए तैयार करता है, पुलिस ने उसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई है।
- रजक समाज का आंदोलन: रजक समाज के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने चेताया है कि यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला और दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पूरे शिवपुरी जिले में उग्र आंदोलन और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
- सीएसपी सचिन अंशुल धुर्वे ने कहा: "हम उक्त मामले की जांच कर रहे हैं जिसके बाद ही कुछ कह सकेंगे"।
थाना प्रभारी (फिजिकल थाना प्रभारी - अवनीश सिंह राठौड़) का बयान
इस पूरे विवाद और मारपीट के आरोपों पर फिजिकल थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा:
"मातादीन अग्रवाल और उनकी पत्नी ने फिजिकल ट्रेनर मोनू रजक पर चोरी को लेकर बेहद प्रबल शंका जताई थी। चोरी वाली रात मोनू रजक की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं और पुलिस द्वारा ली गई उनकी शुरुआती स्टेटमेंट (बयानों) में भी काफी अंतर था। इसी विरोधाभास के चलते उन्हें नियमानुसार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस द्वारा उनके साथ किसी भी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना के आरोप पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद हैं।"











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