कूनो राष्ट्रीय उद्यान के टिकटोली गेट स्थित पर्यटन क्षेत्र में पहली बार एक किशोर नर बाघ (टाइगर tiger) को देखा गया है। संभवतः यह रणथंबोर से आया एक युवा बाघ है, जो नए क्षेत्रों की खोज में निकला है और कुनो के वन्य जीवन में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। प्रकृति हमेशा अपना रास्ता खोज लेती है। (देखिए vairal video)
जानिए क्या है कूनो
* कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park), जो पहले एक वन्यजीव अभयारण्य (1981 में स्थापित) था।
* अब मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में स्थित एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान (2018 में घोषित) है।
* इसका नाम कूनो नदी के नाम पर रखा गया है, जो 748-900 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली हुई है और अब चीता सफारी (भारत में चीता पुनर्वास परियोजना) के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
कूनो नेशनल पार्क के प्रमुख तथ्य:
स्थान और क्षेत्रफल: यह विंध्य पहाड़ियों में स्थित है, जिसका मुख्य क्षेत्र लगभग 748.76 वर्ग किमी है और पारिस्थितिक क्षेत्र इससे भी बड़ा है।
चीता पुनर्वास:
सितंबर 2022 में नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को यहाँ छोड़ा गया, जिससे यह देश का एकमात्र 'चीता सफारी' पार्क बन गया।
वन्यजीव:
चीतों के अलावा, यहाँ तेंदुए, भारतीय भेड़िया, नीलगाय, सांभर, और कई प्रकार के हिरण व पक्षी पाए जाते हैं।
प्राकृतिक विशेषताएँ:
यह चंबल की सहायक नदी कूनो के किनारे बसा है और यहाँ की भू-आकृति में ऊँची पहाड़ियाँ, पठार और घास के मैदान (सवाना) शामिल हैं।
वनस्पति:
यहाँ मुख्य रूप से कर्दई, खैर और सलाई के पेड़ (उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन) पाए जाते हैं।
यह पार्क न केवल जैव विविधता से समृद्ध है, बल्कि पारिस्थितिक बहाली का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।
नये मेहमान लाने की तैयारी
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में प्रोजेक्ट चीता के तहत बोत्सवाना से 8 और चीते 28 फरवरी 2026 तक लाए जा रहे हैं, जिससे पार्क में चीतों का कुनबा और बढ़ेगा। इन नए मेहमानों में 2 मादा चीता और 6 शावक शामिल हैं। अब तक के प्रयासों से कूनो में चीतों की संख्या 30 तक पहुंच चुकी है, जिनमें से 19 भारत में जन्मे हैं।












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