डॉक्टर व्यास बोले, बच्चों के गले में गठान टीबी का है, संकेत
राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष में आयोजित हुआ शिविर
शिवपुरी। नगर की आदिवासी बस्ती बड़ौदी में कुपोषित बच्चों में टीबी की जांच के लिये आज विशेष शिविर लगाया गया। सहरिया बाहुल्य आदिवासी बस्ती बड़ौदी में 30 अति कुपोषित बच्चों एवं उनके पालको में क्षय रोग से बचाव एवं नियत्रंण की डा. आशाीष व्यास द्वारा जांच की गई। इसी मौके पर ऐसे दो बच्चे भी मिले हैं, जिनको टीबी है, अब उनके इलाज का निर्णय लिया गया है। इन दोनों को दो सप्ताह से खांसी, बुखार, वजन कम होना एवं भूख न लगने के साथ साथ गर्दन में गठान थी, जो क्षय रोग यानि टीबी का स्प्ष्ट संकेत है। इसे लेकर डॉक्टर आशीष व्यास ने कहा ये लक्षण नजर आए तो तुरन्त टीबी अस्पताल में जांच कराकर निशुल्क दवा लें। इसके साथ साथ भारत सरकार द्वारा ऐसे मरीजों के लिए 6 माह का कोर्स पूरा करने पर 3000 रुपये देने का प्रावधान भी है। इसके लिए मरीज को हमसे सम्पर्क करना होगा। कुपोषित बच्चों में टीबी होना उनकी जान को जोखिम में डाल सकता है। ऐसे में उनकी जांच एवं दवा शीघ्र शुरु होना बहुत जरुरी है।बड़ी खबर, क्लिक प्लीजइसलिए गए उनके बीच
जिला क्षय रोग एवं नियंत्रण अधिकारी डॉक्टर व्यास आज शक्तिशाली महिला संगठन शिवपुरी द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के समल्लित सहयोग से आयोजित कुपोषित बच्चों में क्षय रोग नियंत्रण के तहत स्वास्थ्य जांच शिविर में ग्रामीणों को बता रहे थे।
राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष में लगा शिविर
कार्यक्रम संयोजक रवि गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष में आदिवासी बस्ती बड़ोदी में विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। जिसमें करीब 30 अति कुपोषित बच्चे एवं 30 कुपोषित बच्चों के पालकों की टीबी की जांच की। जिसमें डा आशाीष व्यास द्वारा 2 कम्फर्म टीबी के केस पाए गए जिनमें एक अतिकुपोषित बच्चा अनिकेत आदिवासी एवं उनके पालक कमलेश आदिवासी को टीबी कन्फर्म थी। जिनका निशुल्क इलाज जिला टीबी अस्पताल में सोमवार से शुरु होगा। इसके साथ मरीज राजमकुमारी पत्नि महेश आदिवासी जो अत्यधिक कमजोरी के कारण आने मेंअसमर्थ थी, उसके घर डाक्टर व्यास एवं संस्था की टीम गई एवं महिला की जांच की। उसे आवश्यक दवाईयां प्रदान की।
ये बोलीं पर्यवेक्षक
पर्यवेक्षक निवेदिता मिश्रा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति टीबी होने पर अपना इलाज टीबी अस्पताल में ही कराए। झाड़ फुक एवं झोलाछाप डाक्टरों से सावधान रहे, इससे आपकी जान को खतरा हो सकता है। रवि गोयल ने बताया कि टीबी से घबराना नहीं है, उससे बचने के लिए आपको समय पर अपनी जांच कराकर 6 माह का कोर्स पूरा करें। अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और सकारात्मक रहे। आप अपना इलाज पूरा करा लेंगें तो आपके परिवार एवं आसपास के बच्चे व लोग टीबी रोग से बच सकते है। कार्यक्रम में डा आशाीष व्यास की टीम द्वारा टीबी से बचाव के लिए पैम्पलेट वितरित किये। कार्यक्रम में डा आशीष व्यास, शक्तिशाली महिला संगठन के रवि गोयल एवं उनकी पूरी टीम, पर्यवेक्षक निवेदिता मिश्रा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रजनी सेन, आशा कार्यकर्ता पूजा लोधी एवं सुपोषण सखी ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

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